पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष बने देश के पहले लोकपाल

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लोकपाल अधिनियम पारित होने के पांच साल बाद भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के मामलों को देखने के लिए लोकपाल कि नियुक्ति आखिरकार कल मंगलवार को हो ही गई।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को मंगलवार को देश के पहले लोकपाल, भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के रूप में नियुक्त किया गया और उन्हें लोकपाल अधिनियम को प्रभावी करने का पदभार दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय सीमा निर्धारित करने के बाद पिछले सप्ताह आयोजित हुई एक बैठक में जस्टिस घोष के नाम को अंतिम रूप दिया। इस बैठक में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष और एक प्रसिद्ध न्यायविद शामिल हुए थे।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पूर्व प्रमुख अर्चना रामासुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, महेन्द्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम को लोकपाल का गैर-न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है और साथ ही साथ न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी और अजय कुमार त्रिपाठी को भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल में न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

66 वर्षीय जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष, मई 2017 में चार साल के कार्यकाल के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से सेवानिवृत्त हुए। वह 29 जून, 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं।

बता दें कि जस्टिस घोष के नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अगुवाई वाली चयन समिति ने की और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने इसे मंजूरी दी।

हालांकि, जस्टिस घोष की नियुक्ति ने इस प्रक्रिया पर विवाद खड़ा कर दिया। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को चयन समिति की बैठक में विशेष आमंत्रित के रूप में बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने उपस्थित होने से इनकार कर दिया।

लोकपाल को केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिलकर काम करना है, यह भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार के आरोपों को देखने के लिए सीबीआई सहित किसी भी जांच एजेंसी को निर्देश दे सकता है।

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